बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबर का हक, जानें नया कानून | Property New Rule

By Nishika

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Property New Rule : भारतीय समाज में लंबे समय तक यह धारणा रही है कि परिवार की जमीन-जायदाद पर सिर्फ बेटों का अधिकार होता है, जबकि बेटियों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता था। लेकिन अब समय बदल चुका है और कानून ने भी इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। आज के समय में बेटी को पिता की संपत्ति में उतना ही अधिकार मिलता है जितना बेटे को। चाहे बेटी शादीशुदा हो या अविवाहित, उसका हक बराबर का होता है। यह बदलाव महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

क्या होती है पैतृक संपत्ति?

पैतृक संपत्ति वह होती है जो परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हो, जैसे दादा-परदादा की जमीन या संपत्ति। यह किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे परिवार की साझा संपत्ति मानी जाती है। ऐसे मामलों में परिवार के सभी कानूनी उत्तराधिकारियों का इस पर बराबर अधिकार होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बेटी को इस संपत्ति में उसका हक जन्म से ही मिल जाता है, यानी जैसे ही उसका जन्म होता है, वह इस संपत्ति की हकदार बन जाती है।

2005 का संशोधन — एक बड़ा बदलाव

साल 2005 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में एक बहुत बड़ा बदलाव किया गया, जिसने बेटियों के अधिकारों को मजबूत किया। पहले पैतृक संपत्ति पर केवल पुरुषों का अधिकार माना जाता था, लेकिन इस संशोधन के बाद बेटियों को भी ‘कोपार्सनर’ यानी बराबर का हिस्सेदार बना दिया गया। इसका मतलब यह हुआ कि अब बेटी को भी वही अधिकार मिल गया जो पहले सिर्फ बेटे को मिलता था। इस बदलाव ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें साफ कहा गया कि बेटी का पैतृक संपत्ति पर अधिकार जन्म से ही होता है। चाहे पिता का निधन 2005 से पहले हुआ हो या बाद में, इससे बेटी के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता। इस फैसले ने कई पुरानी गलतफहमियों को खत्म कर दिया और यह स्पष्ट कर दिया कि बेटी का हक कोई छीन नहीं सकता।

खुद की कमाई हुई संपत्ति का नियम

अगर पिता ने अपनी मेहनत से कोई संपत्ति खरीदी है, तो उसे स्व-अर्जित संपत्ति कहा जाता है। इस पर पिता का पूरा अधिकार होता है और वे अपनी इच्छा के अनुसार इसे किसी को भी दे सकते हैं, चाहे वह बेटा हो, बेटी हो या कोई और। लेकिन अगर पिता ने वसीयत नहीं बनाई है, तो उनकी मृत्यु के बाद यह संपत्ति पत्नी, बेटे और बेटी के बीच बराबर-बराबर बांटी जाती है।

शादी के बाद भी रहता है अधिकार

कई लोग अब भी मानते हैं कि शादी के बाद बेटी का अपने मायके की संपत्ति पर कोई हक नहीं रहता, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। कानून के अनुसार शादी के बाद भी बेटी का अधिकार बना रहता है। अगर उसे उसका हिस्सा नहीं दिया जाता है, तो वह कानूनी रास्ता अपनाकर अपना हक ले सकती है। यह नियम महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए बहुत जरूरी है।

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विवाद होने पर क्या करें?

अगर किसी बेटी को लगता है कि उसे संपत्ति में उसका सही हिस्सा नहीं मिल रहा है, तो वह पहले परिवार के साथ बैठकर बात कर सकती है। अगर बातचीत से मामला हल नहीं होता, तो वह कोर्ट में केस भी दर्ज कर सकती है। इसके लिए जरूरी दस्तावेज और पारिवारिक संबंध के प्रमाण देने होते हैं। एक अच्छे वकील की मदद से यह प्रक्रिया आसान हो सकती है और न्याय मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

कुल मिलाकर, आज के कानून में बेटी और बेटे दोनों को समान अधिकार दिए गए हैं। यह बदलाव समाज में समानता और न्याय को बढ़ावा देता है। हर परिवार को इन नियमों की सही जानकारी होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह का विवाद न हो और बेटियों को उनका हक सम्मान के साथ मिल सके।

Disclaimer :

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। संपत्ति से जुड़े कानून समय-समय पर बदल सकते हैं और हर केस की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। किसी भी कानूनी निर्णय से पहले योग्य वकील या संबंधित प्राधिकरण से सलाह लेना आवश्यक है, ताकि आपको सही और अद्यतन जानकारी मिल सके।

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